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 फलों का राजा कहे जाने वाले रसीले आम के दाम महंगे हो सकते है

ओ फलों के राजा आम पर मौसम की मार।यमुनानगर जिले में आम की फसल को हुआ काफी नुकसान।जिला उद्यान अधिकारी कृष्ण कुमार ने बताया कि हरियाणा के जिला यमुनानगर में सबसे ज्यादा आम की फसल का क्षेत्रफल पाया जाता है। इसमें दशहरी, लंगड़ा, चौसा मुख्यता आम की ये किस्में  पाई जाती हैं। उन्होंने बताया कि इस बार जनवरी-फरवरी में विभाग द्वारा नोटिस किया गया था कि आम के पेड़ों  पर फ्लावरिंग बहुत अच्छी हुई थी। जिससे मैं जताई जा रही थी कि आम का उत्पादन इस बार बहुत अच्छा रहेगा। लेकिन बे मौसम बरसात तेज हवाओं से 70 से 80% का नुकसान यमुनानगर में हुआ है। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा छछरौली  ब्लाक में नुकसान हुआ है। इसके साथ ही रादौर में भी बहुत नुकसान हुआ है ।और वही कलेसर एरिया में नुकसान की मात्रा थोड़ी कम है ।उन्होंने कहा कि अगर उत्तर प्रदेश में भी आम की फसल के यही हालात हुए तो आम के दाम महंगे हो सकते हैं। क्योंकि जब भी किसी भी उत्पादन में कमी आती है और डिमांड बढ़ जाती है  तब तब दाम बढ़ते हैं यह इकोनॉमिक्स का नियम है। 

जिला उद्यान अधिकारी कृष्ण कुमार ने बताया कि फलों व सब्जियों के किसानों के लिए सरकार ने ऐसी स्कीम चलाई है जिसमे बागवानी फसलों को कवर किया जाए ।उस स्कीम का नाम है। मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना। इस स्कीम के अंदर 45 फसलों को रखा गया है।।उन्होंने कहा कि फल ,सब्जियां मसाले वाले सभी किसान इस स्कीम के तहत फसल का  बीमा करवाये।ताकि कोई आपदा आये तो उस समय उनका बचाव हो सके।एक एकड़ सब्जी की खेत पर 750 रुपये की राशि के प्रीमियम से बीमा हो जाएगा।इसी प्रकार फल की फसल के प्रति एकड़ एक हजार रुपए की राशि से बीमा हो जाएगा।आपदा की स्थिति में रिपोर्ट के आधार पर सब्जी के प्रति एकड़ पर 30 हजार रुपए मुआवजा और इसी तरह फलः के लिए 40 हजार प्रति एकड़ मिल सकता है।ये बीमा सीजन टू सीजन है इसमे किसी कंपनी का हस्तक्षेप नही है।यह बीमा सरकार और सीधा किसान के बीच है।कोई भी आपदा,बरसात,ओलावृष्टि,पाला पड़ना या नहर टूटने की वजह से फसल खराब होती है तो इस बीमे में ये सब कवर किया जाता है।बीमा करवाने के 72 घँटे के भीतर विभाग को सूचित करना पड़ता है ताकि जल्द रिपोर्ट बनाकर किसान को मुआवजा राशि मिल सके।इसके लिये पहले 

 मेरी फसल मेरा ब्यौरा पर पंजीकरण करवाएं और फिर मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना के तहत ऑनलाइन  पर पोर्टल पर जाकर वह अपनी फसलों का बीमा करवा सकते हैं ।प्रीमियम की राशि का अभी ऑनलाइन भुगतान पोर्टल के माध्यम से कर सकते हैं। अगर किसी को किसी प्रकार की कोई समस्या आती है तो वह बागवानी विभाग की  सहायता ले सकते है।ब्लॉक लेवल पर भी हमारे अधिकारी हैं और जिला स्तर पर भी हमारा कार्यालय है यहाँ हमसे सीधा संपर्क कर सकते है।

जिला उद्यान अधिकारी कृष्ण कुमार ने बताया कि फलों व सब्जियों के किसानों के लिए सरकार ने ऐसी स्कीम चलाई है जिसमे बागवानी फसलों को कवर किया जाए ।उस स्कीम का नाम है। मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना। इस स्कीम के अंदर 45 फसलों को रखा गया है।।उन्होंने कहा कि फल ,सब्जियां मसाले वाले सभी किसान इस स्कीम के तहत फसल का  बीमा करवाये।ताकि कोई आपदा आये तो उस समय उनका बचाव हो सके।एक एकड़ सब्जी की खेत पर 750 रुपये की राशि के प्रीमियम से बीमा हो जाएगा।इसी प्रकार फल की फसल के प्रति एकड़ एक हजार रुपए की राशि से बीमा हो जाएगा।आपदा की स्थिति में रिपोर्ट के आधार पर सब्जी के प्रति एकड़ पर 30 हजार रुपए मुआवजा और इसी तरह फलः के लिए 40 हजार प्रति एकड़ मिल सकता है।ये बीमा सीजन टू सीजन है इसमे किसी कंपनी का हस्तक्षेप नही है।यह बीमा सरकार और सीधा किसान के बीच है।कोई भी आपदा,बरसात,ओलावृष्टि,पाला पड़ना या नहर टूटने की वजह से फसल खराब होती है तो इस बीमे में ये सब कवर किया जाता है।बीमा करवाने के 72 घँटे के भीतर विभाग को सूचित करना पड़ता है ताकि जल्द रिपोर्ट बनाकर किसान को मुआवजा राशि मिल सके।इसके लिये पहले 

 मेरी फसल मेरा ब्यौरा पर पंजीकरण करवाएं और फिर मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना के तहत ऑनलाइन  पर पोर्टल पर जाकर वह अपनी फसलों का बीमा करवा सकते हैं ।प्रीमियम की राशि का अभी ऑनलाइन भुगतान पोर्टल के माध्यम से कर सकते हैं। अगर किसी को किसी प्रकार की कोई समस्या आती है तो वह बागवानी विभाग की  सहायता ले सकते है।ब्लॉक लेवल पर भी हमारे अधिकारी हैं और जिला स्तर पर भी हमारा कार्यालय है यहाँ हमसे सीधा संपर्क कर सकते है।

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